Iran Help from Russia:अमेरिका के सबसे बड़े हमले के बाद ईरान बौखलाया रुस से मांगी मदद ।


Iran Help from Russia:अमेरिका और इजरायल के हालिया आक्रामक रुख के बाद ईरान की जैसे-जैसे पीटाई हो रही है।  उसकी अपनी रणनीति में भी अहम बदलाव हुए हैं।ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खोमेनेई ने अपने विशेष दूत और विदेश मंत्री अब्बास को सीधे मास्को रवाना किया। उनका उद्देश्य है कि रूस से खुला और ठोस समर्थन लेना। लेकिन अब देखने वाली बात हैं की रसिया इस पर क्या फैसला करता है। 

उठते सवाल क्या रूस वाकई ईरान का भरोसेमंद सहयोगी है

ईरान को लगता है। कि रूस केवल कूटनीतिक बयानों और सीमित सहयोग तक ही सीमित हो रहा है। जबकि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लड़ाई में ईरान को रूस की खुली मदद चाहिए। अमेरिका और इस्राइल ने जमीन पर हमला करके अपनी मंशा जाहिर कर दी है। खोमेनेई का जो पत्र पुतिन को सोपा गया है इसमे नाराजगी और अपेक्षा का प्रतिबिंब लगता है। जब से ईरान के विदेश मंत्री रुस गए हैं। तब से पूरी दुनिया की निगाहें रूस के अगले कदम पर टिकी हुई है कि रसिया इस पर अब क्या फैसला लेता है।

ईरान का बढ़ता अकेलापन और बेचैनी

ईरान के लिए यह एक महत्वपूर्ण चुनौती है। कि जब अमेरिका उसकी सैनिक और परमाणु क्षमता को निशाना बना रहा है।  तब उसका सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार रुस भी स्पष्ट समर्थन देने से हिचक रहा है। यह बताता है,कि क्षेत्रीय राजनीति में दोस्ती स्थाई नहीं होती यह सिर्फ कहने वाली बात है और स्थिति के ऊपर डिपेंड करती है। रूस की यह कूटनीति ईरान के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। वह अब यह सोचने पर मजबूर है कि क्या वह सही समय पर सही जगह से मदद मांग रहा है या नहीं क्योंकि रूस के अलावा इस समय पूरे वर्ल्ड में ईरान की सहायता करने वाला कोई नहीं है शिवाय रसिया के।

मध्य पूर्व की बिगड़ती स्थिति

अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद  मध्य पूर्व में ध्रुवीकरण तेज हो गया है। एक ओर ईरान है जो अपने वजूद और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिरोध की मुद्रा में है। तो दूसरी ओर अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी है। जो इसे एक प्रमाणू खतरे के तौर पर पेश कर रहे हैं। इसी बीच सऊदी अरब जैसे क्षेत्रीय शक्तियां भी सतर्क रूप से स्थिति पर न जाए बनाए हुए है। की रूस यदि खुलकर ईरान के पक्ष में आता है।  तो यह ध्रुवीकरण और भी गहरा हो सकता है।

रूस की क्या है मजबूरी

रूस की स्थिति जटिल है। वह सीरिया युद्ध में पहले से ही संसाधन और सैनिक झोक चुका है। साथ ही वह यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के बोझ तले दबा है। पुतिन फिलहाल अपने हित साधने के लिए लो प्रोफाइल नीति अपना रहे हैं। जहां वे ना तो अमेरिका से रिश्ते बिगाड़ना चाहते हैं। और ना हीं ईरान को पूरी तरह नाराज करना चाहता हैं। यही कारण है कि वह इजरायल के हमले की निंदा तो करता हैं, लेकिन अमेरिकी  हमलो पर चुप्पी साधे रहता हैं। आने वाले कुछ हफ्तों में रूस की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि वह ईरान की खुलकर मदद करता है या बस खाली निंदा करके ही बचना चाहता है।

ईरान के लिए भविष्य की रणनीति

ईरान अब अपने पारंपरिक सहयोगी की भूमिका पर पुनर्विचार कर रहा है। यह दौरा सिर्फ समर्थन लेने की कोशिश नहीं बल्कि यह संकेत भी है कि अगर रूस जैसे देश निर्णायक नहीं हुई तो ईरान अपनी रणनीति को और ज्यादा आत्मनिर्भर और आक्रामक बना सकता है। भविष्य में यह उसी चीज या अन्य उभरती शक्तियों की ओर मोड़ सकती है। जो अमेरिका से संतुलन बनाना चाहते हैं। लेकिन रूस इस क्षेत्र में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा खिलाड़ी है। और इसको इनकार नहीं किया जा सकता है चाहे वह ईरान हो सऊदी हो और या और कोई मध्य पूर्व के देश रूस को नजर अंदाज करना मुश्किल है। लेकिन देखने वाली बात अब यह है कि ईरान रूस के बाद क्या चीन से भी मदद मांगता है या नहीं क्योंकि चीन ने अभी तक सिर्फ निंदा के अलावा और कुछ भी नहीं कहा है अमेरिका और इजरायल के बारे में और उसने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इसलिए इस युद्ध में आने वाला समय बहुत ही महत्वपूर्ण है। ईरान और इसराइल दोनों ही देशों के लिए।

Crocin Tablet : दर्द और बुखार से राहत का एक भरोसेमंद उपाय


Crocin tablet 10s एक विश्वसनीय और प्रभावी दवा है। जो दर्द और बुखार से राहत प्रदान करने के लिए जानी जाती है। यह एक संयोजन दवा है जो एनाल्जेसिक और ज्वर नाशक गुणों से युक्त है और इसका उपयोग मुख्य रूप से हल्के से मध्य दर्द के इलाज के लिए किया जाता है।

इसमें सर दर्द, माइग्रेन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द, दांत दर्द, मासिक धर्म का दर्द और आमवती दर्द शामिल है। इसके अलावा यह सर्दी इन्फ्लूएंजा और गले में खराश जैसे लक्षणों से राहत प्रदान करने के साथ-साथ बुखार को कम करने में भी मदद करता है।

इस लेख में हम क्रोसिन टैबलेट 10 इसके उपयोग लाभ सावधानियां और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आपको यह समझना में आसानी हो सके और अपने स्वास्थ्य के लिए सही निर्णय ले सके।

Crocin Tablet क्या है?

Crocin Tablet 10s एक संयोजन दवा है। जिसमें दो मुख्य सक्रिय घटक होते हैं। Paracetamol और Caffeine,  Paracetamol एक एनाल्जेसिक और ज्वर नाशक दवा है जो दर्द को कम करने और शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।

वही Caffeine दूसरी ओर Paracetamol के अवशोषण को बढ़ाकर इसकी प्रभावशीलता को और बेहतर बनाता है। जिससे दर्द से राहत लंबे समय तक बनी रहती है। यह दवा भारत में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है और इसे सिर दर्द और बुखार जैसे सामान्य लक्षणों के लिए एक भरोसेमंद उपाय माना जाता है।

क्रोसिन टैबलेट  को 1934 से saridon  ब्रांड के तहत विश्वसनीय के साथ जोड़ा गया है। यह न केवल प्रभावि है, बल्कि इसे ले जाना और भंडारण करना भी आसान है। जिससे यह हर घर के प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है।

Crocin Tablet के उपयोग क्या है?

Crocin Tablet का उपयोग विभिन्न प्रकार के दर्द और बुखार से संबंधित स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है इसके कुछ प्रमुख उपयोग कुछ इस प्रकार हैं:

सर दर्द (Headache) : क्रोसिन टैबलेट सर दर्द विशेष रूप से तनाव और हल्के माइग्रेन के दर्द को कम करने में बहुत ज्यादा प्रभावि है।

माइग्रेन (Migraine) : यह माइग्रेन के कारण होने वाले मध्यम दर्द को कम करने में मदद करता है। विशेषकर जब इसे शुरूआती लक्षणों के दौरान लिया जाता है।

मांसपेशियों में दर्द (Muscle Pain) : मांसपेशियों में खिंचाव मोच या थकान के कारण होने वाले दर्द से राहत प्रदान करता है।

पीठ दर्द (Back Pain) : हल्के से या मध्यम पीठ दर्द,  विशेष रूप से तनाव या गलत पोश्चर के कारण होने वाले दर्द में उपयोगी है। 

दांत दर्द (Toothache) : दांतों में दर्द या मसूड़ो की सूजन से होने वाली तकलीफ को कम करता है।

मासिक धर्म का दर्द (Menstrual Pain) : मासिक धर्म के दौरान होने वाले पेट और कमर के दर्द को कम करने में प्रभावी है।

बुखार (Fever) : सर्दी Flu या अन्य वायरस बैक्टीरिया संक्रमण के कारण होने वाले बुखार को कम करने में मदद करता है।

 सर्दी और फ्लू के लक्षण (Cold And Flu Symptoms) : गले में खराश सर्दी शरीर में दर्द और बुखार जैसे लक्षणों से राहत प्रदान करता है।

 आमवाती दर्द (Rheumatic Pain) : जोड़ो और मांसपेशियों में होने वाले आमवाती दर्द को कम करने में सहायक है।

Crocin Tablet के लाभ ?

Crocin tablet के मुख्य लाभ जो है वह तेजी से राहत प्रदान करना है।  क्रोसिन में मौजूद पेरासिटामोल और Caffeine का संयोजन दर्द और बुखार को जल्दी कम करता है जिससे रोगी को तुरंत राहत मिलती है।

सावधानियां और चेतावनियां

क्रोसिन टैबलेट का उपयोग करते समय निम्नलिखित सावधानियां जरूर बरतें:

चिकित्सक की सलाह यदि आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं या कोई अन्य दवा ले रही हैं, तो क्रोसिन लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

अधिक खुराक लेने से बचें: पेरासिटामोल की अधिक मात्रा लेने से लीवर को गंभीर नुकसान हो सकता है,शराब से परहेज क्रोसिन लेते समय शराब का सेवन न करें क्योंकि इससे लीवर पर दबाव पड़ सकता है,एलर्जी की जांच: यदि आपको पेरासिटामोल Caffeine या अन्य दावों से एलर्जी है तो इसका उपयोग न करें। 

देश के मशहूर शिक्षक खान सर की गुपचुप शादी: पढ़ाते-पढ़ाते छात्रों को दी जानकारी, बताया क्यों रखा विवाह गुप्त?


Khan sir marriage news:भारत के सबसे लोकप्रिय और चर्चित शिक्षकों में से एक, खान सर ने हाल ही में अपने छात्रों को एक बड़ी निजी जानकारी दी, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया। खान सर ने पढ़ाई के दौरान यह बताया कि उनकी शादी हो चुकी है, और यह विवाह इस महीने की शुरुआत में ही संपन्न हुआ है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि यह शादी बेहद गुप्त तरीके से हुई और इसकी भनक तक किसी को नहीं लगी।

खान सर, जिनका असली नाम आम तौर पर वे सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं करते, अपने अंदाज़, भाषा, व्याख्या की शैली और राष्ट्रभक्ति की भावना के लिए युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। वे न केवल पढ़ाते हैं, बल्कि देश-विदेश के मुद्दों पर भी छात्रों को जागरूक करते हैं। उनके वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों की संख्या में देखे जाते हैं और देशभर के विद्यार्थी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।

पढ़ाते समय दी जानकारी

छात्रों के साथ अपनी कक्षा में बातचीत करते समय जब एक छात्र ने शादी को लेकर चुटकी ली, तो खान सर ने मुस्कराते हुए कहा, "हमारी तो इस महीने की शुरुआत में ही शादी हो गई है, लेकिन हमने बताया नहीं।" इस घोषणा के बाद पूरे क्लासरूम में कुछ पलों के लिए सन्नाटा छा गया, और फिर तालियों और हँसी के साथ माहौल हल्का हो गया।

कई छात्रों और श्रोताओं को पहले लगा कि यह भी खान सर के व्यंग्यात्मक अंदाज़ का हिस्सा है, लेकिन जब उन्होंने गंभीरता से इसका ज़िक्र करना जारी रखा तो सबको यकीन हो गया कि यह बात सच है।

शादी को गुप्त क्यों रखा गया?

जब छात्रों ने यह सवाल किया कि शादी की बात उन्होंने छुपाकर क्यों रखी, तो खान सर ने बेहद संवेदनशीलता के साथ इसका उत्तर दिया। उन्होंने कहा, "हमने शादी इस लिए गुप्त रखी क्योंकि उस समय देश में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए थे। ऐसी स्थिति में व्यक्तिगत उत्सवों की घोषणा करना मुझे सही नहीं लगा। देश पहले है।"

उनकी यह बात सुनकर कई छात्रों की आंखें नम हो गईं। यह जवाब एक बार फिर उनके राष्ट्रभक्ति के जज्बे को उजागर करता है, जिसके लिए वे जाने जाते हैं।

सोशल मीडिया पर मची हलचल

जैसे ही यह खबर बाहर आई, सोशल मीडिया पर हलचल मच गई। ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर आग की तरह फैल गई। उनके प्रशंसक उन्हें बधाइयाँ देने लगे। "खान सर" ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे, और हज़ारों की संख्या में लोग उनकी पोस्ट और पुराने वीडियो शेयर करते हुए शादी की बधाई देने लगे।

कई छात्रों ने लिखा कि "खान सर ने फिर साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त हैं।"

निजी जीवन को लेकर हमेशा रहते हैं संकोच में

खान सर अपने निजी जीवन के बारे में अधिक बात नहीं करते। उन्होंने कई बार यह कहा है कि उनका जीवन आम लोगों की तरह है और वे नहीं चाहते कि उनकी निजी जिंदगी का प्रचार हो। वे मानते हैं कि शिक्षक का मुख्य कार्य समाज को दिशा देना होता है, न कि व्यक्तिगत चीज़ों से ध्यान भटकाना।

इसलिए जब उन्होंने अचानक शादी की जानकारी दी, तो यह उनके अनुयायियों के लिए एक बड़ा आश्चर्य रहा।

खान सर: एक परिचय

खान सर की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके यूट्यूब चैनल "Khan GS Research Centre" के करोड़ों सब्सक्राइबर हैं। वे शिक्षा को आसान और दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। इतिहास, भूगोल, विज्ञान, करंट अफेयर्स जैसे जटिल विषयों को भी वे ऐसे अंदाज़ में पढ़ाते हैं कि विद्यार्थी उसे भूल नहीं पाते।

वे कई बार देश के संवेदनशील मुद्दों पर भी बोलते आए हैं — चाहे वो किसान आंदोलन हो, नागरिकता संशोधन कानून या फिर कोरोना काल में सरकार की नीतियाँ। वे हर बार तथ्यों के साथ तर्क करते हैं और युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

छात्रों से खास रिश्ता

खान सर का छात्रों से एक खास रिश्ता है। वे अपने छात्रों को 'बच्चा लोग' कहकर पुकारते हैं, और यह संबोधन अब उनका एक ट्रेडमार्क बन चुका है। उनके वीडियो में आम भाषा, हास्य, व्यंग्य और शिक्षा का अनोखा मेल देखने को मिलता है।

छात्र उन्हें सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक और दोस्त की तरह मानते हैं। उनके जीवन की यह नई शुरुआत भी छात्रों ने उसी प्यार और आत्मीयता से स्वीकार की है।

खान सर की शादी की यह खबर उनके प्रशंसकों के लिए एक सुखद आश्चर्य रही, लेकिन इससे उनकी पढ़ाने की शैली या उनकी लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा है। वे अब भी अपनी कक्षाओं में उतनी ही ऊर्जा और लगन से पढ़ाते हैं, और देश-दुनिया के महत्वपूर्ण विषयों पर छात्रों को जागरूक करने का काम जारी रखते हैं। उनका यह नया अध्याय न केवल उनके निजी जीवन में खुशी लेकर आया है, बल्कि उनके फॉलोअर्स के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन गया है कि जीवन में संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।

इसके अलावा, खान सर ने यह भी कहा है कि वे अपने निजी जीवन को सार्वजनिक करने के मामले में सतर्क रहेंगे, ताकि उनका मुख्य ध्यान शिक्षा और छात्रों की उन्नति पर बना रहे। उन्होंने अपने छात्रों से आग्रह किया है कि वे पढ़ाई पर फोकस करें और अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करें। उनकी यह विनम्रता और समर्पण ही उन्हें अलग बनाता है, और इसी वजह से वे युवाओं के दिलों में एक खास जगह बनाते हैं।


निष्कर्ष
खान सर की यह शादी भले ही गुपचुप तरीके से हुई हो, लेकिन जिस ईमानदारी और देशभक्ति के जज्बे के साथ उन्होंने इसका कारण बताया, वह लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। शिक्षा जगत में ऐसे शिक्षक कम ही मिलते हैं जो न केवल ज्ञान देते हैं, बल्कि जीवन के मूल्यों की भी शिक्षा देते हैं। देश उन्हें आज एक शिक्षक से कहीं अधिक, एक जिम्मेदार नागरिक और आदर्श पुरुष के रूप में देखता है।

T. Raja Singh Resign: तेलंगाना में बीजेपी को बड़ा झटका विधायक टी राजा सिंह ने दिया इस्तीफा

T. Raja Singh Resign: इस समय हैदराबाद से बड़ी खबर सामने आ रही है। की तेलंगाना बीजेपी विधायक टी. राजा सिंह ने सोमवार को पार्टी के प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह फैसला तेलंगाना में नए राज्य अध्यक्ष की नियुक्ति की खबरों के बाद लिया जिसे उन्होंने आश्चर्यजनक और निराशाजनक करार दिया है।बीजेपी के इस फैसले से टी राजा सिंह नाराज बताए जा रहे हैं।

इस्तीफा का मुख्य कारण क्या है

टी राजा सिंह ने जी किशन रेड्डी को लिखे अपने पत्र में कहा है। कि मीडिया में आई खबरों, जिसमे रामचंद्र राव को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाने की चर्चा थी। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताया उन्होंने इसे स्वयं और लाखों कार्यकर्ताओं के लिए झटका और धोखा करार दिया है इसके बाद उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया। 

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को गुमराह किया यह चयन पार्टी के हितों के खिलाफ जाकर भविष्य में संगठन को कमजोर कर सकता है। खासकर जब बीजेपी पहली बार तेलंगाना में सरकार बनाने की प्रबल संभावना देख रही थी।

टी राजा सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर त्यागपत्र की काफी साझा करते हुए लिखा बहुतों की चुप्पी को सहमति नहीं समझना चाहिए। मैं उन अनगिनत कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के लिए बोल रहा हूं जो आज निराशा महसूस कर रहे हैं जय श्री राम।

नेतृत्व विवाद और बीजेपी की रणनीति

टी राजा सिंह ने हाल ही में एक वीडियो संदेश में भाजपा नेतृत्व से खुद को तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने की मांग की थी।  उन्होंने दावा किया था कि पार्टी कार्यकर्ता उन्हें इस पद पर देखना चाहते हैं। राजा सिंह ने गौर रच्छा और हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित बिग बनाने की योजना भी प्रस्तुत की थी। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भाजपा हाई कमान ने रामचंद्र राव को अध्यक्ष पद के लिए चुना जिससे राजा सिंह और उनके समर्थकों में असंतोष फैल गया।

टी राजा सिंह का राजनीतिक सफर

गोसामहल से तीन बार के विधायक टी राजा सिंह तेलंगाना में बीजेपी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। वह 2014,2018 और 2023 में बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज कर चुके हैं। उनके तीखे बयानों और हिंदुत्व के प्रति उनकी मुखरता ने उन्हें एक तरफ लोकप्रियता दिलाई तो दूसरी तरफ कई विवादों में भी घेरा 2022 में पैगंबर मोहम्मद पर उनकी कथित टिप्पणी के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले उनका निलंबन रद्द कर दिया गया था। 

बीजेपी के लिए चुनौती क्या है

टी राजा सिंह का इस्तीफा तेलंगाना में बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। खासकर तब जब पार्टी राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने की दिशा में काम कर रही थी। उनके समर्थकों का मानना है कि यह फैसला पार्टी के हिंदुत्व वादी आधार को कमजोर कर सकता है। राजा सिंह ने अपने बयान में स्पष्ट किया है। कि वह भाजपा छोड़ने के बावजूद हिंदुत्व और गोशामहल की जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। अब आगे देखने वाली बातें यह है कि बीजेपी क्या उन्हें मानती है। या टी राजा सिंह अपना आगे का रास्ता चुनने के लिए आजाद है।

आगे क्या हो सकता है

राजा सिंह ने विधायकी से इस्तीफा नहीं दिया है। जिसके चलते वह निर्दलीय विधायक के तौर पर अपनी भूमिका निभा सकते हैं। उनके इस कदम से तेलंगाना की राजनीति में नई हलचल की संभावना है। बीजेपी हाई कम।न अब इस संकट को कैसे संभालती है यह देखने वाली बात होगी।

हिंदुत्व का अडिग समर्थन

भले ही वह पार्टी में नहीं है,राजा सिंह ने स्पष्ट किया कि वह हिंदुत्व और गोशामहल के लोगों की सेवा से पीछे नहीं हटेंगे उन्होंने कहा कि अब उनकी आवाज पहले से भी तेज होगी।

भविष्य की संभावनाएं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टी राजा सिंह का यह कदम तेलंगाना में बीजेपी की आंतरिक कलह को और उजागर कर सकता है। कुछ का कहना है कि राजा सिंह अपनी नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने की योजना बना रहे हैं। जिसमें वह हिंदुत्ववादी एजेंट को और मजबूती से आगे बढ़ा सकते हैं। उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में अभियान शुरू कर दिया है। जिसमें वह तेलंगाना की जनता का सच्चा प्रतिनिधि बता रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि राजा सिंह का अगला कदम क्या होगा और बीजेपी इस स्थिति से कैसे निपटती है।

Mansoon Updates: अबकी बार मानसून ने तोड़ा रिकॉर्ड देशभर में समय से पहले पहुंचा बारिश का दौर


Mansoon Updates: इस साल पूरे भारतवर्ष में मानसून ने समय से पहले ही अपना जलवा दिखा दिया है। केरल में 24 मई को मानसून ने दस्तक देकर फिर तेजी से पूरे देश में फैल गया और 29 जून तक पूरे भारत को अपनी चपेट में ले लिया जो की 8 जुलाई की औसत तिथि से 9 दिन पहले हो गया है। यह 2020 के बाद से सबसे तेज विस्तार माना जा रहा है। 

दिल्ली में इस बार मानसून का आगमन भी 29 जून को हो गया हालांकि इसकी घोषणा 2 दिन की देरी से हुई। वहीं दिल्ली एनसीआर में मानसून की वजह से भारी बारिश ने उमश भरी गर्मी से राहत दी तापमान में 10-12 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है।


हालांकि कुछ इलाकों में भारी बारिश के कारण जल जमाव की समस्या ने लोगों को परेशान भी किया है। IMD ने अपने बयान में बताया कि मानसून आज राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पूरी दिल्ली में आगे बढ़ गया है। अगले 7 दिनों में उत्तर, पश्चिम, मध्य पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई जा रही है।

इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी:

IMD के अनुसार 29 और 30 जून को झारखंड के कुछ इलाकों में और 29 जून को ओडिशा में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा लद्दाख हिमाचल प्रदेश पूर्वोत्तर बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं पंजाब, हरियाणा केरल और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा सकती है।

केरल में समय से पहले मानसून की एंट्री:

इस साल मानसून ने केरल में 24 में को ही दस्तक दे दी थी। जो की सामान्य तिथि 1 जून से पहले ही हो गई अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में मजबूत निम्न दबाव प्रणालियों के कारण मानसून ने तेजी से प्रगति की और 29 मैं तक मुंबई मध्य महाराष्ट्र और पूरे पूर्वोत्तर को कवर कर लिया।

दिल्ली में बारिश से राहत और चुनौतियां:

दिल्ली में मानसून पहुंचने से शहर वासियों को गर्मी से राहत दी है। हालांकि जल जमाव के कारण कुछ इलाकों में लोगों को परेशानी का सामना कर करना पड़ रहा है। आईएमडी ने अगले कुछ दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है। मानसून की प्रगति और इसके प्रभाव पर नजर रखने के लिए मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर ध्यान देना जरूरी है। देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश का यही हाल अगले कुछ हफ्तों तक जारी रह सकता है। 

जलवायु परिवर्तन और मानसून का बदलता पैटर्न:

हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियमित बारिश और अचानक भारी बारिश की घटनाएं जलवायु परिवर्तन का परिणाम हो सकती है। इस साल समय से पहले मानसून की दस्तक और कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की भविष्यवाणी इस बदलाव का संकेत देती है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को बढ़ा और जल जमाव जैसी आपदाओं से निपटने के लिए पहले से बेहतर योजना बनाने की जरूरत है।

मानसून की प्रगति और भविष्य की तैयारी:

IMD नई चेतावनी दी है कि अगले कुछ हफ्तों में मानसून की प्रगति और तेज हो सकती है। जिसके कारण देश के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। स्थानीय प्रशासन को जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की तैयारी करने की सलाह दी गई है। साथ ही किसानों को भी सलाह दी जा रही है। कि वह मानसून के इस दौर का अधिकतम लाभ उठाने के लिए अपनी फसलों की बुवाई और अन्य गतिविधियों की योजना बनाएं और उस पर कम करें।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव होगा:

समय से पहले मानसून की दस्तक से देश के कृषि क्षेत्र में उम्मीदें जगी हैं।खासकर धान ganna और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने खेतों की तैयारी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का वितरण संतुलित रहा तो इस बार खाद्याउत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इसे मजबूती मिलेगी हालांकि बाढ़ की स्थिति में फसलों को नुकसान भी हो सकता है।इसलिए सरकार को एडवांस अलर्ट और राहत व्यवस्था को सक्रिय रखना होगा।

कोलकाता लॉ कॉलेज गैंग रेप,सुरक्षा गार्ड सहित कुल चार गिरफ्तार

West Bengal Rape Case:पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हाल ही में दक्षिण कोलकाता ला कालेज में 24 वर्षीय प्रथम वर्ष की छात्रा के साथ कथित गैंगरेप की घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह घटना पिछले साल अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक 31 इयर्स जूनियर डॉक्टर के साथ में बलात्कार और हत्या की घटना के एक साल से भी कम समय में हुई है। जिसने पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया था।

मामले का विवरण इस प्रकार

घटना 25 जून 2025 को दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज में एक 24 वर्षी छात्र के साथ कथित तौर पर गैंगरेप हुआ है।  छात्रा का आरोप है, कि तीन लोगों मुख्य अभियुक्त मनोजित मिश्रा जैब अहमद और परमीत मुखर्जी ने कॉलेज के गार्ड रूम में उसके साथ बलात्कार किया। कोलकाता पुलिस ने मुख्य अभियुक्त मनोजित, जैब अहमद और परमिट मुखर्जी को 26 जून को गिरफ्तार किया। इसके अलावा 28 जून को 55 वर्षी सुरक्षा गार्ड पिनाकी बैनर्जी को भी गिरफ्तार किया गया।क्योंकि सीसीटीवी फुटेज में वह घटनास्थल पर मौजूद था और उसने ना तो पीड़िता की मदद की और ना ही कॉलेज प्रबंधन को सूचित किया। 

मेडिकल जांच में छात्रा के गले और शरीर पर चोट के निशान और जबरन यौन हमले की पुष्टि हुई है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अभियुक्तो ने पहले हमले को रिकॉर्ड किया और उस वीडियो को viral करने की धमकी भी दी।  पुलिस ने कालेज परिसर के सीसीटीवी फुटेज जप्त किए हैं। जिसमें सुरक्षा गार्ड को बाहर घूमते हुए देखा गया पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मनोजित मिश्र के खिलाफ पहले की शिकायतों के बावजूद कोई औपचारिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और उसे कॉलेज में अस्थाई नौकरी कैसे मिली।

अभियुक्तों का तृणमूल कांग्रेस से संबंध

मनोजित मिश्र मुख्य अभियुक्त कॉलेज का पूर्व छात्र और तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद का पूर्व अध्यक्ष रह चुका है। वह वर्तमान में कॉलेज में अस्थाई कर्मचारियों के रूप में कार्यरत था। सोशल मीडिया पर उसकी त्रिणमूल कांग्रेस के नेताओं जैसे अभिषेक बनर्जी के साथ तस्वीर भी वायरल हो रही है।

इसी बीच दूसरे आरोपी जैब अहमद और मुखर्जी वर्तमान मे छात्र हैं। और कथित तौर पर टीएमपी से जुड़े हैं। टीएमसी ने दावा किया है। कि मनोजित का पार्टी से कोई संबंध नहीं है। लेकिन विपक्षी दलों ने इसे खारिज करते हुए टीएमसी पर अभियुक्तों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। राजनीतिक संरचना का सवाल जहां तक है पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या मनोजित को टीएमसी के बड़े नेताओं का संरक्षण प्राप्त था या नहीं, जिसके कारण उसके खिलाफ पहले की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई कुछ सूत्रों के अनुसार मनोजित को कालीघाट क्षेत्र जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आवास है में प्रभावशाली माना जाता था। 

बीजेपी का टीएमसी पर हमला

पश्चिम बंगाल की दूसरी मुख्य राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को टीएमसी की बिफलता और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों का प्रतीक बताया। भाजपा ने ममता बनर्जी से स्थिति पर दवा है कि टीएमसी ने शैक्षणिक संस्थाओं को राजनीतिक अड्डा बना दिया है। कांग्रेस और Cpi ने भी टीएमसी पर निशाना साधा इसे रेप culture को बढ़ावा देने आरोप लगाया। cpi की नेता वृंदा करात ने टीएमसी सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

पुलिस जांच और सवाल

पुलिस ने एक विशेष जांच दल गठित किया है। और तीनों अभियुक्तो को 1 जुलाई तक पुलिस हिरासत में रखा गया है। सुरक्षा गार्ड पिनाकी बैनर्जी के बयान असंगत और संदिग्ध पाए गए है और पुलिस जानने की कोशिश कर रही है कि, उसने घटना के दौरान कोई कार्रवाई क्यों नहीं की मनोजित पर 2017 में कॉलेज परिसर में तोड़फोड़ का आरोप था और वह 2007 में कॉलेज में दाखिल हुआ,पढ़ाई छोड़ दी और फिर 2017 में बाएलएलबी कोर्स में शामिल हुआ 2021 में टीएमपी से हटाए जाने के बावजूद उसे कॉलेज में नौकरी मिली जिसके पीछे संभावित राजनीतिक प्रभाव की जांच चल रही है। पुलिस अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है,कि क्या उन्हें घटना की पूरी जानकारी थी और कॉलेज प्रबंधन ने सुरक्षा उपायों में ढिलाई क्यों बरती,घटना से पहले कॉलेज में सीसीटीवी कैमरे नहीं थे और 28 जून को उनकी स्थापना को विपक्ष ने देर से उठाया गया कदम बताया है।


SCO पत्र पर राजनाथ सिंह का हस्ताक्षर करने से इनकार,दुनिया ने देखी भारत की ताकत जानिए क्या हुआ

SCO Summit 2025: ऑपरेशन सिंदूर में भारत के हाथों पिटने के बाद पाकिस्तान और चीन लगातार साजिश कर रहे हैं। भारत और भारत के पक्ष को नीचा दिखाने के लिए कोई भी मौका छोड़ते नहीं है। लेकिन इन दोनों देशों की सभी कोशिश नाकाम साबित हो रही है। अभी हाल ही में खत्म हुई शंघाई सहयोग संगठन मे भी एक ऐसा मौका आया जब पाकिस्तान और उसके दोस्त चीन को मुंह की खानी पड़ी मामला यह था,कि जो SCO पत्र जारी होता है। उसमें बलूचिस्तान को जो वहां की आर्मी, BLA उसको आतंकवादी संगठन बताया जा रहा था। इसी बात से नाराज भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उस सामूहिक पत्र पर अपने दस्तखत करने से इनकार कर दिया जिससे पाकिस्तान और उसके दोस्त चीन की साजिश नाकाम हो गई।

क्या था पूरा मामला

शंघाई सहयोग संगठन की रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर कड़ा संदेश देते हुए अपनी मनसा जाहिर कर दी। जिसमें पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की मौजूदगी में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, विशेष रूप से 22 अप्रैल के पहलगाम हमले और इसके जवाब में भारत के ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए भारत का पक्ष मजबूती से रखा।

उन्होंने आतंकवाद को नीति के तौर पर इस्तेमाल करने वाले देशों की निंदा की और कहा कि आतंकवादियों और उनके प्रायोजक को जवाब देही तय होना जरूरी है। नहीं तो एशिया के किसी भी कोने में शांति नहीं हो सकती है।

राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद और शांति एक साथ नहीं चल सकते उन्होंने सीईओ सदस्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और निर्णायक कार्रवाई की अपील की साथ ही दोहरे मापदंडों को खारिज करने पर जोर दिया। सिंह ने कहा कुछ देश आतंकवाद को नीति के रूप में इस्तेमाल करते हैं। और आतंकवादियों को पनाह देते हैं ऐसे देशो को इसके परिणाम भुगतने होंगे।

संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर से भारत का इनकार

बैठक के दौरान चीन और पाकिस्तान ने संयुक्त बयान में बलूचिस्तान का उल्लेख करने की कोशिश की लेकिन पहलगाम हमले का जिक्र नहीं किया गया। भारत ने इस दोहरे रवैए का कड़ा विरोध करते हुए संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, बयान में आतंकवाद और सीमा पार खतरों का उल्लेख ना होने के कारण भारत ने यह कदम उठाया।

जिसके चलते SCO को कोई अंतिम घोषणा पत्र जारी नहीं करना पड़ा सिंह ने पहलगाम हमले का हवाला देते हुए कहा कि पहलगाम में जिस टेरेरिस्ट फ्रंट ने अंजाम दिया जिसमें 26 नागरिकों की जान गई।उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार बताया और इसके बाद उस पत्र पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।

क्या है SCO का महत्व और भारत की भूमिका

शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में क्षेत्रीय स्थिरता सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना और तब से आतंकवाद क्षेत्रीय सुरक्षा और मध्य एशिया के साथ संपर्क जैसे मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

संगठन के 10 सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस भी शामिल है।

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय शांति सुरक्षा और विश्वास की कमी को प्रमुख चुनौतियां बताया उन्होंने SCO देशो से आतंकवाद के वित्त पोषण और सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग भी की।

भारत का आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख

पाकिस्तान और चीन के दबाव के बावजूद राजनाथ सिंह ने भारत के आतंकवाद विरोधी रुख को कड़ाई से प्रस्तुत किया। उनकी यह कार्रवाई न केवल पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर बेनकाब करने में सफल रही बल्कि भारत की आतंकवाद के प्रति शून्य संवेदनशीलता की नीति को भी रेखांकित किया।

सिंह ने कहा SCO को उन देशों की निंदा करने में संकोच नहीं करनी चाहिए जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। यह बैठक 25 से 26 जून को चीन में आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता चीन ने किया था।

Iran Thanks India: 12 दिन की जंग के बाद ईरान ने बोला भारत को धन्यवाद जानिए क्यों


Iran Thanks India: इसराइल और ईरान के बीच 12 दिनों तक चला धमाकेदार युद्ध आखिरकार समाप्त हो गया है।इन दोनों के बीच समझौता करने में अहम भूमिका अमेरिका ने निभाई भले ही युद्ध रुक गया हो पर, इस संघर्ष की गूंज भारत तक सुनाई दी जहां एक तरफ ईरान ने भारत की जनता का हृदय से धन्यवाद किया वहीं दूसरी ओर इसराइल ने अपने सैनिक व रणनीतिक विजय का दावा करते हुए भारत का जिक्र तक नहीं किया है। 

ईरान ने भारत को कहां शुक्रिया

दिल्ली में स्थित ईरानी दूतावास ने बुधवार को एक विस्तार पूर्वक बयान में कहा की हम भारत के लोगों को शुक्रिया करना चाहते हैं। जिन्होंने ईरान की जनता, जब सैनिक आक्रमण झेल रही थी। तब भारत से मिला नैतिक समर्थन और एकजुटता हमारे लिए एक दीपक की तरह था। 

ईरानी दूतावास ने अपने बयान में यह भी कहा कि हम भारत के राजनीतिक दलों, मीडिया, आध्यात्मिक नेताओं और आम नागरिकों को विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहते हैं। क्योंकि उन्होंने मुश्किल की इस घड़ी में ईरान का पूरा साथ दिया उन्होंने इसे भारत की जागरूक अंतरात्मा और न्यायप्रियता का प्रतीक भी बताया। 

इसराइल ने नहीं लिया भारत का नाम

इसी बीच इजरायल के विदेश मंत्रालय ने सीज फायर की पुष्टि करते हुए कहा कि युद्ध में उसने अपने सभी लक्षण को हासिल कर लिया है। जिसे उन्होंने युद्ध स्टार्ट करने से पहले चिन्हित किया था।

ईरान के सैकड़ो आतंकवादियों का सफाया परमाणु और बैलिस्टिक हमले को नाकाम करना और खुद को विश्व की अग्रणी सैन्य शक्तियों में स्थापित करना था जिसे उन्होंने हासिल किया है।

भारत की नई कूटनीतिक पहचान

12 दिन तक चले इस भीषण युद्ध में भारत ने किसी भी एक पक्ष का खुला समर्थन नहीं किया। लेकिन दोनों देशों में उसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई दिया जहां ईरान ने भारत को संवेदनशील समर्थन के लिए सराहा। वहीं भारत ने वैश्विक मंच पर नैतिक नेतृत्व का परिचय दिया बिना किसी पक्ष को नाराज किए हुए। जहां तक विश्लेषको का मानना है कि भारत अब सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि नैतिक और कूटनीतिक संतुलन का प्रतीक भी बन गया है, इस पूरे युद्ध में चीन और रसिया के अलावा ईरान का खुला समर्थन करने वाला कोई भी देश नहीं था शिवाय भारत के मूक समर्थन करने के अलावा।

भारत की छवि तटस्थता नही

इस पूरे घटनाक्रम में भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति को एक नए रूप में प्रस्तुत किया है। यह अब केवल तटस्थता नहीं बल्कि नैतिक नेतृत्व की भूमिका में परिवर्तित हो चुका है। जहां भारत ना तो किसी पक्ष का समर्थन करता है। ना विरोध लेकिन संकट में संवेदनशीलता और विवेक से खड़ा दिखाई देता है। यही वजह है कि ईरान जैसे कट्टरपंथी राष्ट्र ने भी भारत को खुलेआम धन्यवाद देने में कोई संकोच नहीं किया है।

अमेरिका और चीन पर नजर

अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस युद्ध विराम पर कई प्रतिक्रियाएं आ रही है। अमेरिका और उसके सहयोगी इजरायल के दावे को रणनीतिक सफलता मार रहे हैं। वहीं चीन और रूस की चुप्पी रणनीतिक रूप से अर्थपूर्ण मानी जा रही है। इस बीच भारत की स्थिति को विश्लेषकों ने एक सॉफ्ट पावर और सुपर पावर की तरह देखा। जो बंदूकन के बजाय सहिष्णुता और सम्मान की भाषा बोलता है। जिसकी बात को अब विश्व मंच पर गंभीरता से सुना जा रहा है।

आगे भारत को क्या करना चाहिए

इस सीज फायर ने युद्ध को बीराम भले दे दिया हो लेकिन मध्य पूर्व में तनाव अभी भी जीवित है। भारत के सामने यह अवसर है। कि वह इस स्थिति को राजनीतिक पहल में बदले चाहे वह मानव अधिकारों की वकालत हो या संयुक्त राष्ट्र के मंच पर शांति वार्ता को मजबूती देना। वही यह क्षण हो सकता है। जब भारत न केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय नैतिक मार्गदर्शन के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है।

अब इसमें देखने वाली बात है कि यह शांति कितने दिनों तक रहती है।अगर दोनों पक्ष संयम बरते, तो पूरी दुनिया को उम्मीद है कि अब आने वाले दिनों में कोई लड़ाई झगड़ा नहीं होगा इन दोनों के बीच में।

Train Ticket Price: 1 जुलाई से महंगा होगा ट्रेन का सफर Ac और Non-Ac किराए में बढ़ोतरी तय जानिए कितना बढ़ेगा किराया

Train Ticket Price: जो लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं। उनके लिए बड़ी खबर सामने आ रही है।की लंबी दूरी की यात्रा के लिए इंडियन रेलवे 1 जुलाई 2025 से किराए में बढ़ोतरी कर सकता है। यह बदलाव मेल एक्सप्रेस और सेकंड क्लास ट्रेनों की AC और Non-Ac कोचों में लागू किया जाएगा।

किन यात्रियों पर नहीं पड़ेगा असर:

अच्छी खबर यह है कि 500 किलोमीटर तक की यात्रा करने वालों पर इस बढ़ोतरी का कोई असर नहीं होगा यानी जो लोग रोजाना या कम दूरी की यात्रा करते हैं। उन्हें पुराने दामों पर ही टिकट मिलेगा यह बदलाव सिर्फ 500 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करने वाले यात्रियों पर ही लागू किया जाएगा।

कितना बढ़ेगा किराया:

नॉन एसी वाले और एक्सप्रेस ट्रेनों में सफर करने वालों को एक पैसे प्रति किलोमीटर अधिक किराया देना पड़ेगा वही एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों को दो पैसे प्रति किलोमीटर की हो सकती है। सेकंड क्लास के यात्रियों को 500 किलोमीटर के ऊपर आधा पैसे प्रति किलोमीटर ज्यादा किराया देना होगा।

रेलवे की नई किराया पॉलिसी क्या कहती है:

सूत्रों के मुताबिक यह खबर सामने आई है। कि रेलवे एक नई पॉलिसी लाने पर विचार कर रहा है। इसके तहत Ac कोच में सफर पर प्रति किलोमीटर दो पैसे और नॉन एसी कोच में एक पैसा अतिरिक्त चार्ज पे करना पड़ेगा सेकंड क्लास में लंबी दूरी तय करने पर आधा पैसा प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी हो सकती है

अभी फैसला बाकी है:

हालांकि एक पत्र रेलवे बोर्ड की तरफ से तैयार करके रेल मंत्रालय को भेजा जा चुका है। लेकिन अब तक अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इसीलिए राहत की सांस लेने वाली बात है। कि अभी कैबिनेट से पास नहीं हुआ है। जहां तक सूत्रों की बात करें तो उनका कहना है। कि यह नई पॉलिसी लागू हो जाएगी आने वाले 1 जुलाई से।

क्यों जरूरी हो गई है किराया में बढ़ोतरी:

भारतीय रेलवे लंबे समय से अपने चालू खर्च को लेकर दबाव में है। उसे काम करने के लिए जिसमें ईंधन की कीमतें मेंटेनेंस खर्च और नई ट्रेनों के परिचालन के चलते रेलवे को हर साल भारी घाटा उठाना पड़ता है ,के लिए किराए में बढ़ोतरी जरूरी हो गई है। यही वजह है कि अब किराए में मामूली बढ़ोतरी कर राजस्व बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ताकि यात्री सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सके और रेलवे में यात्रा करने वाले यात्रियों को कोई दिक्कत का सामना ना करना पड़े।

किस तरह से तय होता है ट्रेन का किराया:

रेलवे का किराया कई कारकों के आधार पर तय किया जाता है। जैसे की श्रेणी उसमें मेल एक्सप्रेस सुपरफास्ट की दूरी, कोच का प्रकार जैसे Ac-Non-Ac और यात्रा का समय इस आधार पर तय किया जाता है। नई नीति के तहत किराए की गणना में पारदर्शिता बढ़ेगी और यात्रियों को पहले से अंदाजा हो सकेगा कि कितने किलोमीटर की यात्रा पर कितना शुल्क देना पड़ेगा।

कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत क्यों:

रेलवे बोर्ड के मुताबिक कम दूरी पर सफर करने वाले आमतौर पर कामकाजी लोग होते हैं। जिसमें छात्र और ग्रामीण क्षेत्र के यात्री होते हैं। उनके बजट को देखते हुए ही रेलवे ने यह फैसला लिया है। कि 500 किलोमीटर तक कोई अतिरिक्त बोझ ना डाला जाए इसका फायदा मध्यम और निम्न आय वर्ग के यात्रियों को मिलेगी।

डिजिटल टिकटिंग से मिलेगा फायदा:

नई किराया पॉलिसी लागू होने के साथ ही रेलवे अपनी डिजिटल टिकटिंग प्रणाली को और मजबूत बनाने जा रहा है। यात्री अब ऑनलाइन बुकिंग करते समय साफ-साफ देख सकेंगे कि उनका किराया कैसे तय हुआ है। और उसमें कौन-कौन से शुल्क शामिल है।इससे धोखाधड़ी की संभावना घटेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी जिससे रेलवे में यात्रा करने वाले यात्रियों को फायदा होगा। इन सब चीजों से एक बात तो साफ है की ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों की जेब ढीली होने वाली है।

यात्रियों की राय क्या है:

हालांकि किराए में यह बढ़ोतरी मामूली लग सकती है। लेकिन कई यात्रियों का मानना है कि पहले से ही ट्रेनों की उपलब्धता, समय पालन और साफ सफाई जैसी सुविधाओं में सुधार की जरूरत थी, जिसे रेलवे ने ध्यान नहीं दिया ऐसे में रेलवे को चाहिए कि किराए बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों को बेहतर सेवा देने के दिशा में भी ठोस कदम उठाया जाए जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।

America Attack On Iran:ईरान पर अमेरिकी बमबारी से बदला युद्ध का रुख नेतन्याहू ने ट्रम्प को बताया इतिहास रचने वाला


America Attack On Iran:अमेरिका ने जब से ईरान के परमाणु साइटों पर हमला किया है।  तब से पूरे दुनिया में हलचल मची हुई है। रविवार सुबह जैसे ही इसराइल के प्रधानमंत्री नेनेतन्याहू  ने अपने ऑफिस से अंग्रेजी में जनता को संबोधित करना शुरू किया तभी पूरे मध्य पूर्व की धड़कनें तेज हो गई।  उन्होंने खुलकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ की और वह भी उस वक्त जब ईरान के फोर्डो जैसे पहाड़ी दुर्ग में लगातार धमाके हो रहे थे।और इस धमाके की आवाज न केवल पूरे ईरान बल्कि पूरे विश्व में सुनाई दे रहे थे। 

रविवार को चीन के सरकारी मीडिया ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमले की कड़ी आलोचना की बल्कि बेंजीग ने इसे उकसावे की कार्रवाई बताते हुए क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा करार दिया है। 

चीनी रक्षा विशेषज्ञ ने दावा किया है।कि इन हमलों में अमेरिका ने अपने b2 स्टिल्ट bombers का इस्तेमाल जरूर किया है।लेकिन ईरान की भूमिगत परमाणु सुविधा इतनी मजबूत थी। कि पहले बमबारी लहर मे उन्हें भेद नहीं सकी खासकर फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर जो ईरान की सबसे गुप्त और सुरक्षा कवच वाली सुविधा मानी जाती है। को कुछ नहीं हुआ।

ईरान का पलटवार हम तैयार थे झटका नहीं लगा:

हमले के बीच ईरानी अधिकारियों ने भी अमेरिकी दावे को खारिज करते हुए बीबीसी को बताया कि हमारी सुविधा सुरक्षित है। और हमें कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।चीन की नौसेना के सीनियर विश्लेषक झांग जूनसे ने कहा कि अमेरिका की बमबारी से जितने नुकसान इसराइल ने पहले कर लिया था। उससे अधिक कुछ नहीं हुआ उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने अपनी परमाणु क्षमताएं फैला रखी है।  और अमेरिका की बमबारी उन पर कोई निर्णायक प्रभाव नहीं डाल पाई है।

क्या युद्ध और भी तेज होगा:

इसी बीच चीन ने शनिवार को संघर्ष विराम की अपील की थी। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं रुकी तो पश्चिम एशिया एक और गंभीर युद्ध की मुहाने पर पहुंच सकता है। 

क्या ईरान का जवाब अभी बाकी है:

ईरान ने तुरंत कहा कि उसने पहले ही अपनी संवेदनशील परमाणु सामग्री को दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया था। यानी अमेरिका और इजराइल के हाथ कुछ नहीं लगा।  इसके साथ huti विद्रोहियों ने कहा है कि अगर अमेरिका आगे बढ़ा तो लाल सागर में उसके जहाज टारगेट बनेंगे। 

यह चेतावनी महज शब्द नहीं बल्कि उस चिंगारी का संकेत है। जो पूरे खाड़ी क्षेत्र को जलाकर राख कर सकती है। अमेरिकी सैनिक, तेल के जहाज और खाड़ी देशों में अमेरिका जहां अपने सैनिक रखता है वह सभी अड्डे ईरान की रणनीति में है।

अमेरिकी हमले के बाद क्या अब शांति आएगी:

इस बात में कोई शक नहीं है कि अमेरिकी बी2 स्टिल्थ बॉम्बर्स ने जंग की दिशा को बदल दिया है।लेकिन इस बमबारी से क्या नेनेतन्याहू अपने वर्षों पुराने एजेंट ईरान को परमाणु ताकत बनने से रोकना में सफल हो पाएंगे या फिर ईरान अपने परछाई वाले दुश्मनों जैसे सीरिया इराक और लेबनान के जरिए अमेरिका और इसराइल को धीमा और घातक जवाब देगा।

ट्रंप की धमकी और ईरान की चुप्पी क्या एक बड़ा खेल चल रहा है:

शनिवार रात ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर ईरान ने पलटवार किया तो अमेरिका अपनी पूरी ताकत से जवाब देगा। लेकिन यह बयान भी एक रणनीतिक चल हो सकती है अमेरिका इस समय सीधे युद्ध में दिलचस्पी नहीं ले रहा। बल्कि सीमित हमले और मनोवैज्ञानिक दबाव की नीति अपनाना चाहता है। ऐसे में ईरान क्या करेगा सीधे हमले या छाया युद्ध। यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

क्या यह संघर्ष का अंत है या महायुद्ध की शुरुआत?

फिलहाल तो इस पूरे घटना ने यह साफ कर दिया है कि ईरान और इजरायल के बीच की दुश्मनी अब सिर्फ बॉर्डर तक सीमित नहीं है यह एक वैश्विक पावर गेम का हिस्सा बन चुकी है। जहां अमेरिका की भागीदारी नए अध्याय लिख रही है। नेतन्याहू को भले ही आज की जीत की मुस्कान मिल गई हो लेकिन इसराइल और अमेरिका को पता है यह सन्नाटा तूफान से पहले का भी हो सकता है। आने वाले दोनों में यह देखना होगा कि ईरान क्या रणनीति अपनाता हैं क्या वह अमेरिकी सैनिक अड्डों पर हमला करता है या फिर खाली इजरायली सैनिकों को ही निशाना बनाता है।